Wednesday, September 25, 2013

ग़ज़ल हुई.......

May 9, 2012 at 1:43pm
नज़र नज़र से मिली तो जानो ग़ज़ल हुई
होश खोकर उसकी खबर ली तो जानो ग़ज़ल हुई
हया ओ शर्म से लिपटी नज़रें झुकी तो जानो ग़ज़ल हुई
सर चढ़ के मचल मचल जूनून ऐ इश्क बोले तो जानो ग़ज़ल हुई
शोला सा दहक जाए उधर तो जानो ग़ज़ल हुई
नर्म बिस्तर बने उदास काटे न कटे रात तो जानो ग़ज़ल हुई
मिले इश्क की सौगात लुटाये हर वो जज़्बात तो जानो ग़ज़ल हुई
हर हाल में बहते अलफ़ाज़ बनते नगमा ओ शेर,दिला जाते दाद तो जानो ग़ज़ल हुई
जब उसके क़दमों में जन्नत ढूंढें तो जानो ग़ज़ल हुई
हर चेहरे में वो चेहरा ढूंढें तो जानो ग़ज़ल हुई
सारी दुनिया को भूल उसको याद करें तो जानो ग़ज़ल हुई
मुद्दतें बीतें चान्दिनी छा  जाए गेसुओं पर तब भी दिल यूँही  धड़के तो जानो फिर ग़ज़ल हुई.....

No comments:

Post a Comment