बम बम भोले . . . . .
बम बम भोले ! रे मन तू शिवमय हो ले
प्राणी मन ! मत हार मान तू
जीत को जीत से सींच
शिव को प्रसन्न कर ले !
भरी जेब हो या फिर खाली
सुबह -शाम बजा कर ताली
डमरू की फिर बजा डुगडुगी
त्रिशूल को मन से नमन कर ले
इस जीवन को नई दिशा दे ले !
रे मन तू शिवमय हो ले !
जीवन क्या है, एक मृगतृष्णा कोरी
भरे कभी न ये प्यास तेरी
अब मूँद कर आँखें
तू रूद्र का ध्यान कर ले
रे मन प्राणी तू शिवमय हो ले !
माँ गंगा को जिसने बाँधा
पुरे वेग से जटा में साधा
तभी वह देवाधिदेव कहलाया
हैं भोलेनाथ शिव अति प्यारे
भक्तों के संकट दूर करें पल में सारे
स्तोत्र ग्रन्थ पोथी-पंथ सभी
ब्रह्मा विष्णु नंदी गौरा गण भी
करते महादेव की पूजा-अर्चना सभी
दषानन ने भी किया परम शिव का ही ध्यान
रे मन तू बस शिवमय हो ले !
विश्व के विष को गटका जिसने
नीलकंठ नाम धारण किया शिव ने
शिवशक्ति की उपासना कर
धैर्य संयम का महारथी हो ले
जीवन का विष तू भी पी जा
हँस कर ये जीवन जिए जा
रे मन प्राणी तू शिवमय हो जा
धूनी रमा कर बैठ जा
फिर, क्या मरघट क्या मधुशाला !
क्या प्रातः क्या संध्या
क्या क्षीण क्या कम्पित काया !
मन से हर हर महादेव का उच्चारण कर ले
ॐ नमः शिवायः जप ले
सारे कष्टों से तर ले
रे मन तू बस शिवमय हो ले ! ! !
ॐ
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