Wednesday, September 25, 2013

राहें..

September 5, 2013 at 10:01pm
राहें   कितनी ही कठिन क्यूँ न हों
मंजिल ज्यादा दूर नहीं
झुलसती धूप कितनी ही तेज़ क्यूँ न हों
घनी छाँव बहुत दूर नहीं
मीलों सफ़र करना है
यूँही थक कर गिरना नहीं
मन प्रबल साथ हो
ईश का उसमें वास हो
देवालय फिर कहीं दूर नहीं
मत भूल यहाँ तक भी तू आ पहुंचा है
कर्म ,किस्मत  का मिलाजुला लेखा है
फिर प्रियजनों  का भी हाथ है
उठ, मुस्कुरा सर उठा कर आगे बढ़
नए पल,नए दिन का सामना कर
हार जीत की चिंता छोड़
बस कर्म पथ पर चलता चल
कर्म पथ पर चलता चल  

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