ये रिश्ते .....
नाज़ुक कोमल पंखुरी से रिश्ते
पंख लगे उड़ते रिश्ते
सूने गलियारों में चेह चहाते ये रिश्ते
कभी बंद दरवाजों के पीछे भीजते नम ये रिश्ते
हाढ़-मांस से बने ये खून के रिश्ते
कभी गाँठ बन जाते बोझ ढोते ये रिश्ते
सीमा मर्यादा लांघते चारदीवारी के बंधन
सब के बीच चीरहरण करते ये रिश्ते
हर पल छल से छलनी करते चुभते
भोले मन को आहत करते ये रिश्ते
न दर्द न टीस न आह ही भरते
बस नश्तर चुभोते ये रिश्ते
कल के मंगल आज के अमंगल
शकुन से अपशकुन हो जाते ये रिश्ते
कभी पायल की छन से छनकते
चूड़ी की खनक से खनकते
आज सिर्फ कानों में विष घोलते ये रिश्ते
कुछ भी कहो ,हवा हो गए वो मान मनौव्वल के रिश्ते
अब तो बस यदा-कदा ही दिखते ये रिश्ते
मोह से भरपूर माया से भ्रमित करते ये रिश्ते
सच तो ये है ,की केवल कहानी के पन्नों में बसते हैं ये रिश्ते.....
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