Wednesday, September 25, 2013

ये रिश्ते .....

April 29, 2012 at 3:26pm

नाज़ुक कोमल पंखुरी से रिश्ते
पंख लगे उड़ते रिश्ते

सूने गलियारों में चेह चहाते  ये रिश्ते
कभी बंद दरवाजों के पीछे भीजते नम  ये रिश्ते

हाढ़-मांस से बने ये खून के रिश्ते
कभी गाँठ बन जाते बोझ ढोते  ये रिश्ते

सीमा मर्यादा लांघते  चारदीवारी के बंधन
सब के बीच चीरहरण करते  ये रिश्ते

हर पल छल से छलनी करते चुभते
भोले मन को आहत करते  ये रिश्ते

न दर्द न टीस न आह ही भरते
बस नश्तर चुभोते  ये रिश्ते

कल के मंगल आज के अमंगल
शकुन से अपशकुन हो जाते  ये रिश्ते

कभी पायल की छन से छनकते
चूड़ी की खनक से खनकते
आज सिर्फ कानों में विष घोलते  ये रिश्ते

कुछ भी कहो ,हवा हो गए वो मान मनौव्वल के रिश्ते
अब तो बस यदा-कदा ही दिखते  ये रिश्ते

मोह से भरपूर माया से भ्रमित करते  ये रिश्ते
सच तो ये है ,की केवल कहानी के पन्नों में बसते हैं  ये रिश्ते.....

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