गीत -ऋतु फाल्गुन की आयी
ऋतु फाल्गुन की आई
साजन का संदेसा लायी
ठण्ड गुलाबी छायी
खिली धुप गुनगुनायी
उजली किरण शर्मायी
मंद-मंद सजनी मुस्कायी
ऋतु फाल्गुन की आयी
प्यार की बौछार लायी
रंगों की सौगात लायी
ठण्ड गुलाबी छायी
ऋतु फाल्गुन की आयी
साजन बैरागी की राह तके सजनिया
राह देखे नैन तरसे थक गयी अंखियाँ
रंग बरसे,छलके हर ओर-शोर
मन तरसे इस छोर पोर-पोर
तन भीज-भीज जाए चुनर डोर-डोर
सजनी का मन झूमे जैसे चाँद चकोर
नैन उठे धीरे-धीरे
पग बढ़े धीमे-धीमे
दिल धड़का जोर-जोर
जब सांकल खड़खड़आई
जब सांकल खड़खड़आई ..
फाल्गुन ऋतु आयी
साजन का संदेसा लायी
टुक-टुक अँखियाँ देखे
साजन की बाट जोहे
छर-छर बौछार आये
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