Wednesday, September 25, 2013

       ग़ज़ल हुई
नज़र नज़र से मिली तो जानो ग़ज़ल हुई
होश खोकर उसकी खबर ली तो जानो ग़ज़ल हुई
हया शर्म से लिपटी नज़रें झुकी तो जानो ग़ज़ल हुई
सर चढ़ के मचल मचल जूनून इश्क बोले तो जानो ग़ज़ल हुई
शोला सा दहक जाए उधर तो जानो ग़ज़ल हुई
नर्म बिस्तर बने उदास काटे कटे रात तो जानो ग़ज़ल हुई
मिले इश्क की सौगात लुटाये हर वो जज़्बात तो जानो ग़ज़ल हुई
हर हाल में बहते अलफ़ाज़ बनते नगमा शेर,दिला जाते दाद तो जानो ग़ज़ल हुई
जब उसके क़दमों में जन्नत ढूंढें तो जानो ग़ज़ल हुई
हर चेहरे में वो चेहरा ढूंढें तो जानो ग़ज़ल हुई
सारी दुनिया को भूल उसको याद करें तो जानो ग़ज़ल हुई

मुद्दतें बीतें चान्दिनी छा  जाए गेसुओं पर तब भी दिल यूँही  धड़के तो जानो फिर ग़ज़ल हुई.....

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