कोरा पन्ना या खाली कैनवस
कोरा पन्ना या खाली कैनवस
मूक हैं;
जब तक उनका भाग्य-विधाता
उन्हें बोल न दे दे
जितने कौशल से वह ताना-बाना बुनेगा
एक नवीन चित्र ,रूप,आकार प्रदान करेगा
उतना ही वह जीवन्त हो उठेगा
जैसे संगीतकार कोरी सरगम
पिरोकर राग तैयार करता है
और संगीत बज उठता है
मनुष्य जीवन भी कुछ ऐसा ही है
कोरे मन पर खींचती हैं लकीरें
हाशिये भर की ही मात्र गुन्जायिश रहती है
यही अनुभव की लकीरें
जीने का सलीका देतीं हैं
फिर कुछ और रूप धर्ता है प्राणी
कभी वाक्चातुर्य में कुशल
कभी बहती नदी सा शांत,निर्मल और;
कभी दहकता हुआ आग का शोला
फिर स्वयं को श्रम-कर्म-वचन से लिप्त
स्वेद और रक्त बिन्दु से सज्जित करता
आधा-अधूरा नहीं...
अर्थ पूर्ण तभी होता;
जब कल्याण की ओर प्रयत्नशील रहता
जागृत रहता सुप्त अवस्था में
निरंतर कर्मशील,अग्रसर
तब कोरा मन अस्तित्व धारण करता है
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