एक मंज़र
बादलों को चीर के चमक उठी रेशमी किरने
अपने आग़ोश में सिमटा कर सूना कोहरापन
उठी जब धुंद खिल उठे राहगुज़र
दूर खड़े दरख्तों ने भी पहरे उठाये
खुला आसमाँ हँसता मुस्कुराता
परिंदों को उड़ने का आज़ाद मौका देता
चेह्चाहते परिंदे उड़ते लहलहाते मैदानों में
हरे-भरे चौबारों में खिलते खुलते किवाड़
मुस्कुराते चहकते दिए करते हर घर गुलज़ार
हज़ारों उम्मीदों के चराग एक साथ जगमगाए...........!!
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