रीढ़ की हड्डी
बचपन के दौर से
कान सुनते बुजुर्गों का गान
चाल चलो सीधी
सीना पीठ तान
उम्र फिर हुई अठातर
पीठ सीधी तान
अब कमर न लचका खाए
रीढ़ की हड्डी भी करे सम्मान
वाचक व्यक्ति बन न्याय प्रिय
भाषण झिह्वा देती जाए
मस्तिष्क की ऐसी कौन सी धारा
जो न्याय प्रिय वाचक को कब स्वयं लचीला बनाये
अनर्थ का संग भी रीढ़ की हड्डी को ही दोषी पाए
भाषण टिप्पणी देना अति सरल सहज बड़े हजूर
न्याय संग डोर थामे कब -कब चले आँखें मूँद
पर करें क्या उस बुध्दि का
जो पल-पल खेल रचाए-दिखाए
स्वाभिमान अभिमान सब ताक पर धरा रह जाए
सब धरा रह जाए...! ! !
कान सुनते बुजुर्गों का गान
चाल चलो सीधी
सीना पीठ तान
उम्र फिर हुई अठातर
पीठ सीधी तान
अब कमर न लचका खाए
रीढ़ की हड्डी भी करे सम्मान
वाचक व्यक्ति बन न्याय प्रिय
भाषण झिह्वा देती जाए
मस्तिष्क की ऐसी कौन सी धारा
जो न्याय प्रिय वाचक को कब स्वयं लचीला बनाये
अनर्थ का संग भी रीढ़ की हड्डी को ही दोषी पाए
भाषण टिप्पणी देना अति सरल सहज बड़े हजूर
न्याय संग डोर थामे कब -कब चले आँखें मूँद
पर करें क्या उस बुध्दि का
जो पल-पल खेल रचाए-दिखाए
स्वाभिमान अभिमान सब ताक पर धरा रह जाए
सब धरा रह जाए...! ! !
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